बरेली में हाल ही में भड़की हिंसा के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए मौलाना तौकीर रज़ा और उनके करीबी सहयोगियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत मंगलवार को नरियावाल क्षेत्र में हाजी शराफत के स्वामित्व वाला बरातघर और सुर्खा बानखाना इलाके में पार्षद ओमान रज़ा के नवनिर्मित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को सील कर दिया गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
प्रशासन यहीं नहीं रुका, बल्कि तौकीर रज़ा के अन्य करीबी सहयोगियों की संपत्तियों पर भी छापेमारी और जांच की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ. नफीस के मार्केट की 36 दुकानें और उनके अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि जिन संपत्तियों में अवैध निर्माण या सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की आशंका पाई गई है, उन पर आगे बुलडोज़र की कार्रवाई भी संभव है।
हिंसा की जांच को लेकर अब तक कई एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियाँ हुई हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मौलाना तौकीर रज़ा को इस पूरे प्रकरण का मुख्य साज़िशकर्ता माना जा रहा है, इसलिए उनके सहयोगियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। जिन स्थानों से हिंसा भड़काने या अव्यवस्था फैलाने की आशंका जुड़ी है, वहां सीधी कार्रवाई की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रभावित इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी रोक भी लगा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या गलत जानकारी फैलने से रोका जा सके। वहीं प्रशासन ने साफ कहा है कि शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन संपत्तियों को सील किया गया है, उनकी वैधानिक जांच के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। जहां प्रशासन और कानून-व्यवस्था के जिम्मेदार अधिकारी इसे जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे अचानक उठाया गया कठोर कदम मान रहे हैं, जिससे छोटे कारोबारियों और आम जनता पर भी असर पड़ा है। इसके बावजूद प्रशासन का कहना है कि सभी कदम कानूनी प्रक्रिया और सबूतों के आधार पर ही उठाए गए हैं और किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा।




