कैबिनेट मीटिंग में अहम घोषणाएँ: MSP बढ़ी, हाईवे विस्तृत होगा और रिसर्च टैलेंट को मिलेगा प्रोत्साहन

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केंद्र सरकार की कैबिनेट ने बुधवार को कृषि, अवसंरचना और अनुसंधान से जुड़ी कई अहम घोषणाएँ कीं। सबसे बड़ा फैसला गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर लिया गया, जिसमें आगामी रबी सीजन (2026-27) के लिए प्रति क्विंटल ₹160 की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद गेहूं की नई MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल हो गई है, जो किसानों के लिए लगभग 6.6 प्रतिशत की आय वृद्धि सुनिश्चित करती है। सरकार का कहना है कि इस कदम से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और कृषि क्षेत्र की आय सुरक्षा भी मजबूत होगी। इसके अलावा जौ, सरसों और अन्य रबी फसलों की MSP में भी अलग-अलग वृद्धि की गई है, जिससे खेती-किसानी से जुड़े लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

कैबिनेट की बैठक में अवसंरचना विकास के क्षेत्र में भी बड़ा निर्णय लिया गया। असम के कालिबोर से नूमालिगड़ तक राष्ट्रीय राजमार्ग-715 के 85.675 किलोमीटर लंबे हिस्से को चार लेन में विस्तृत करने की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹6,957 करोड़ है और इसे इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-एंड-कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड पर विकसित किया जाएगा। इस मार्ग का एक हिस्सा काजिरंगा नेशनल पार्क से होकर गुजरता है, इसलिए परियोजना में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे। जैसे—उच्च स्तरीय एलिवेटेड कॉरिडोर और सुरक्षित पशु मार्ग—ताकि सड़क विस्तार से अभयारण्य के पारिस्थितिक तंत्र पर न्यूनतम असर पड़े। यह प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी बढ़ाने, पर्यटन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

अनुसंधान और मानव संसाधन विकास को लेकर भी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। कैबिनेट ने Department of Scientific and Industrial Research (DSIR) और CSIR के तहत ‘Capacity Building and Human Resource Development’ कार्यक्रम को मंजूरी दी है। इस स्कीम के लिए लगभग ₹2,277 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य देशभर के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर प्रदान करना है। इसके अंतर्गत डॉक्टोरल और पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप, पुरस्कार, अनुदान और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल होंगे, जिससे विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और प्रमुख अनुसंधान संस्थानों में शोध संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल लंबे समय में भारत की शोध क्षमता को सशक्त बनाने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।

कुल मिलाकर, कैबिनेट के इन फैसलों का असर तीन बड़े क्षेत्रों पर दिखेगा—किसानों की आय सुरक्षा, अवसंरचना विकास और शोध क्षमता में वृद्धि। MSP बढ़ोतरी से किसानों को त्वरित आर्थिक राहत मिलेगी, वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना पूर्वोत्तर भारत के विकास में नई ऊर्जा डालेगी। इसके साथ ही अनुसंधान-क्षेत्र में मानव संसाधन विकास पर जोर देकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि आने वाले वर्षों में भारत केवल कृषि और अवसंरचना ही नहीं बल्कि ज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में भी मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा।

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