डॉ. संजीव कुमार का राजद में शामिल होना एनडीए के लिए चुनौती, परबत्ता सीट पर बदल सकता है समीकरण

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। खगड़िया जिले की परबत्ता विधानसभा सीट से जदयू विधायक डॉ. संजीव कुमार ने 3 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की सदस्यता ग्रहण की। इस कदम को जदयू के लिए एक बड़ा झटका और राजद के लिए महत्वपूर्ण बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। डॉ. संजीव कुमार का राजनीतिक करियर काफी प्रभावशाली रहा है। उनका जन्म 8 नवंबर 1979 को पटना में हुआ और उन्होंने मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल एवं सेठ जी.एस. मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की। राजनीति में आने से पहले वे एक डॉक्टर के रूप में काम करते थे और वर्तमान में पटना में उनका एक डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित है। उनकी कुल संपत्ति लगभग 19.87 करोड़ रुपये की बताई जाती है। डॉ. संजीव कुमार अपने बेबाक अंदाज और मुद्दों पर स्पष्ट राय रखने के लिए जाने जाते हैं।

पिछले कुछ महीनों से डॉ. संजीव कुमार की जदयू से नाराजगी स्पष्ट हो रही थी। वे लगातार पार्टी और सरकार के कार्यक्रमों से दूरी बना रहे थे। विशेष रूप से 25 सितंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खगड़िया दौरे में उनकी गैरहाज़िरी और 27 सितंबर को परबत्ता में जदयू के कार्यकर्ता सम्मेलन में उनकी अनुपस्थिति इस नाराजगी का संकेत थी। लंबे समय से चल रहे असंतोष ने उन्हें राजद में शामिल होने के निर्णय पर मजबूर किया।

डॉ. संजीव कुमार ने 3 अक्टूबर को अपने हजारों समर्थकों के साथ राजद की सदस्यता ग्रहण की। यह कार्यक्रम खगड़िया जिले के गोगरी स्थित भगवान हाई स्कूल परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें राजद के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी मौजूद थे। इस अवसर पर उन्होंने राजद की नीतियों का समर्थन किया और अपने समर्थकों के साथ पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया। परबत्ता विधानसभा सीट पर डॉ. संजीव कुमार का प्रभाव काफी मजबूत है। 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राजद के उम्मीदवार दिगंबर प्रसाद तिवारी को महज 951 वोटों से हराया था। उनके राजद में शामिल होने से इस क्षेत्र में जदयू की स्थिति कमजोर होने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि डॉ. संजीव कुमार का राजद में शामिल होना जदयू के लिए बड़ा झटका है। उनकी लोकप्रियता और क्षेत्रीय प्रभाव से राजद को परबत्ता में मजबूती मिल सकती है और एनडीए को आगामी विधानसभा चुनाव में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। यह कदम बिहार की राजनीतिक राजनीति में आगामी चुनाव के समीकरण बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। डॉ. संजीव कुमार की यह राजनीतिक छलांग स्पष्ट करती है कि बिहार में आगामी चुनाव में सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और राजद इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम कर सकता है।

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