H‑1B वीज़ा नवीकरण संकट: हजारों भारतीय आईटी पेशेवर अब देश में ही फंसे

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अमेरिकी वर्क वीज़ा H‑1B और इसके आश्रित H‑4 वीज़ा आवेदकों के लिए भारत में संकट गहराया है। दिसंबर 2025 में अमेरिकी कांसुलर कार्यालयों ने अचानक कई वीज़ा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट्स रद्द कर दिए और नई तिथियां महीनों बाद — कुछ मामलों में अक्टूबर 2026 या उससे भी आगे की — निर्धारित की गई हैं। इस अचानक निर्णय के कारण अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय पेशेवर, जो वीज़ा नवीकरण के लिए छुट्टियों के दौरान भारत आए थे, अब अपने देश में ही अटक गए हैं और अपनी नौकरियों पर लौट नहीं पा रहे हैं।

इस संकट का मुख्य कारण अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा हाल ही में लागू की गई सोशल मीडिया जांच नीति है। अब सभी H‑1B और H‑4 वीज़ा आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच अनिवार्य कर दी गई है। इसके चलते कांसुलर कार्यालयों में प्रतिदिन होने वाले इंटरव्यू की संख्या कम हो गई और पहले से तय स्लॉट्स रद्द करने पड़े। साथ ही, वीज़ा इंटरव्यू छूट कार्यक्रम समाप्त कर दिया गया है, जिससे लगभग सभी आवेदकों को प्रत्यक्ष इंटरव्यू में भाग लेना अनिवार्य हो गया है।

इस फैसले से पेशेवरों और उनके परिवारों को बड़ा नुकसान हो रहा है। हजारों भारतीय पेशेवर अपने अमेरिकी नियोक्ताओं के पास लौटने में असमर्थ हैं और कुछ लोग परिवार से दूर रहने की मजबूरी में हैं। टेक कंपनियों ने कर्मचारियों को अनावश्यक अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचने की सलाह दी है ताकि वीज़ा प्रक्रिया प्रभावित न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति “बहुत गंभीर और अराजक” है, क्योंकि लंबी देरी के कारण नौकरी या यात्रा के जोखिम बढ़ गए हैं।

H‑1B वीज़ा अमेरिका में कुशल तकनीकी पेशेवरों को रोजगार पाने का महत्वपूर्ण माध्यम है और हर साल हजारों भारतीय इसका लाभ उठाते हैं। लेकिन नई नीतियों और इंटरव्यू रद्द होने से यह संकट केवल वीज़ा प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक टेक उद्योग और प्रभावित पेशेवरों के परिवारों के लिए भी गंभीर चुनौती बन गया है। आने वाले महीनों में नियमों में बदलाव या समाधान आने तक हजारों पेशेवरों की स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी।

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