लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के 12,492 अनुसूचित जाति बाहुल्य गांवों का कायाकल्प करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस योजना का उद्देश्य इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को आधुनिक बनाना है। ऐसे गांवों का चयन उन क्षेत्रों से किया गया है जहाँ SC आबादी 40% से अधिक है और जनसंख्या कम से कम 500 है, ताकि योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से ग्रामीण समुदाय तक पहुंच सके।
योजना के तहत हर गांव में डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें छात्रों और युवाओं के लिए इ‑बुक्स, वीडियो लेक्चर, क्विज़, ऑडियो कंटेंट और लगभग 20,000 डिजिटल संसाधनों की सुविधा होगी। यह पहल विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए मददगार साबित होगी। इसके अलावा, हर गांव में शुद्ध पेयजल, स्वच्छता व्यवस्था, स्कूल और आंगनबाड़ी में शौचालय, सोलर लाइट और स्ट्रीट लाइट, बोरवेल, पानी की पाइपलाइन, ट्रांसफॉर्मर, मोटर शेड और शवदाह गृह जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अब तक 2,562 गांवों में विकास कार्यों को मंजूरी दी जा चुकी है और 910 गांवों में कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि बाकी में कार्य तेजी से जारी है। स्थानीय ग्राम पंचायतों और सरकारी एजेंसियों के सहयोग से इन परियोजनाओं को सुचारु रूप से लागू किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल ग्रामीण शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि युवाओं की रोजगार तैयारी, स्वास्थ्य मानक और सामाजिक समावेशन में भी बढ़ोतरी होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की यह योजना उन गांवों के लिए है जहाँ सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग की आबादी अधिक है। इसका मकसद इन गांवों को डिजिटल, साफ‑सुथरा और सुविधा‑सम्पन्न बनाकर ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता और युवा शिक्षा में सुधार लाना है। इस पहल से न केवल ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर होगा, बल्कि सामाजिक समावेशन और मुख्यधारा में ग्रामीण भागीदारी भी बढ़ेगी।




