फ्रांस में विदेश मंत्री का बयान, भारत-यूरोप साझेदारी को बताया वैश्विक संतुलन की कुंजी

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फ्रांस के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक हालात को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि भारत और यूरोप मिलकर वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में स्थिरता ला सकते हैं। पेरिस में फ्रांसीसी नेताओं और यूरोपीय प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद मीडिया से संवाद में उन्होंने कहा कि आज की दुनिया अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में भारत और यूरोप जैसी जिम्मेदार शक्तियों की भूमिका और भी अहम हो जाती है।

जयशंकर ने कहा कि भारत और यूरोप के संबंध केवल व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों के बीच साझा मूल्य, लोकतांत्रिक परंपराएं और बहुपक्षीय व्यवस्था में विश्वास की मजबूत नींव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में स्थिरता बनाए रखने के लिए भरोसेमंद साझेदारों के बीच सहयोग जरूरी है और भारत-यूरोप साझेदारी इसी दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है। उनके अनुसार, दोनों पक्ष मिलकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में संतुलन और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भरोसा कायम कर सकते हैं।

विदेश मंत्री ने भारत और यूरोप के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन, रेलवे, विमानन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जा सकता है। जयशंकर ने संकेत दिया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी हो सकता है और इससे वैश्विक बाजारों में स्थिरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

जयशंकर ने यह भी कहा कि यूरोप वैश्विक राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और भारत के लिए यूरोपीय देशों के साथ संबंध मजबूत करना रणनीतिक रूप से आवश्यक है। उन्होंने फ्रांस को भारत का एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार बताते हुए कहा कि भारत-फ्रांस संबंध भारत-यूरोप सहयोग की रीढ़ हैं। रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।

विदेश मंत्री के इस बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भारत और यूरोप के बीच बढ़ता सहयोग न केवल दोनों पक्षों के हितों को साधेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता और संतुलन कायम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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