माघ मेले से योगी का संदेश: संत का कोई निजी स्वार्थ नहीं, राष्ट्र ही उसकी पहचान

SHARE:

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पहला बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा को तेज कर दिया है। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान दिए गए अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने धर्म, संत परंपरा और राष्ट्र को लेकर स्पष्ट विचार रखे। उन्होंने कहा कि संत, योगी या संन्यासी का कोई निजी स्वार्थ या संपत्ति नहीं होती, बल्कि उसका स्वाभिमान ही उसका राष्ट्र होता है और उसका पूरा जीवन धर्म एवं देश की सेवा के लिए समर्पित रहता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी व्यक्ति का नाम लिए कहा कि आज कुछ लोग ऐसे हैं जो संत का भेष धारण कर सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे तत्वों की तुलना ‘कालनेमि’ से करते हुए समाज को उनसे सावधान रहने की अपील की। योगी ने कहा कि सच्चा संत वही है जो धर्म और राष्ट्र को सर्वोपरि माने और किसी भी प्रकार के लोभ, अहंकार या निजी हित से ऊपर उठकर कार्य करे। उनके अनुसार, सनातन परंपरा में संतों की भूमिका समाज को दिशा देने और राष्ट्र की चेतना को जागृत रखने की रही है।

यह बयान उस समय आया है जब माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के काफिले को रोके जाने और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर विवाद गहराया हुआ है। इस घटना के बाद धार्मिक संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली थीं। मुख्यमंत्री के बयान को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जहाँ उन्होंने संतों की मर्यादा, धर्म की गरिमा और राष्ट्रहित को एक साथ जोड़ते हुए अपना पक्ष स्पष्ट किया।

योगी आदित्यनाथ ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि सनातन धर्म भारत की आत्मा है और इसे कमजोर करने वाले प्रयासों से समाज को सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि संत परंपरा का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना, नैतिक मूल्यों को मजबूत करना और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है। उनका यह बयान न केवल शंकराचार्य विवाद के संदर्भ में अहम माना जा रहा है, बल्कि आने वाले समय में धार्मिक और सामाजिक विमर्श को दिशा देने वाला भी बताया जा रहा है।

Leave a Comment