पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के बीच भारत सरकार ने संसद में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने संसद में बयान देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में तेजी से बदल रहे हालात भारत के लिए चिंता का विषय हैं और सरकार पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान संवाद, संयम और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। भारत सभी पक्षों से अपील करता है कि वे तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाएं और बातचीत के जरिए विवादों का समाधान निकालें।
जयशंकर ने बताया कि पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार वहां की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है और जरूरत पड़ने पर भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने संसद को जानकारी दी कि हालिया संकट के दौरान अब तक करीब 67 हजार भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, जबकि बाकी लोगों के लिए भी आवश्यक सहायता और समन्वय की व्यवस्था जारी है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की नीति तीन प्रमुख पहलुओं पर आधारित है—पहला, क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन देना; दूसरा, पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना; और तीसरा, देश के ऊर्जा और आर्थिक हितों की रक्षा करना। उन्होंने यह भी बताया कि भारत संबंधित देशों की सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है और हालात के अनुसार आगे की रणनीति तय की जा रही है।
इस मुद्दे पर संसद में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया संकट पर विस्तृत चर्चा की मांग करते हुए कहा कि सरकार को इस विषय पर संसद में व्यापक बहस करानी चाहिए ताकि देश के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। वहीं सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और राष्ट्रीय हितों तथा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर आवश्यक कदम उठा रही है।




