राज्यसभा में विदाई के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि राजनीति में कभी “फुलस्टॉप” नहीं होता, बल्कि यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने सेवानिवृत्त हो रहे राज्यसभा सदस्यों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका अनुभव और मार्गदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद मूल्यवान है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर को केवल विदाई समारोह न मानकर, इसे सीखने और प्रेरणा लेने का अवसर बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि संसद केवल कानून बनाने की जगह नहीं है, बल्कि यह देश की विविधता, विचारों और अनुभवों का संगम भी है। उन्होंने कहा कि जो सदस्य अब सदन से विदा ले रहे हैं, उन्होंने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा की और नीतियों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई। उनके अनुभव से नए सांसदों को सीख लेनी चाहिए, ताकि वे भी देशहित में बेहतर निर्णय ले सकें।
इस दौरान उन्होंने नए सांसदों को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें वरिष्ठ सदस्यों के अनुभवों से प्रेरणा लेकर अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए। राजनीति में धैर्य, अनुशासन और निरंतर सीखने की भावना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जनसेवा का कार्य किसी पद या सदन तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वस्थ संवाद और सहयोग की भावना आवश्यक है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखें। इस मौके पर कई सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी विदा ले रहे सदस्यों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और विश्वास जताया कि वे आगे भी देश और समाज की सेवा में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे। उनका यह संदेश न केवल सांसदों के लिए, बल्कि पूरे राजनीतिक वर्ग के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में देखा जा रहा है।




