प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का त्रिनिदाद और टोबैगो दौरा सिर्फ एक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक कड़ी का पुनः स्मरण है। करीब 25 साल पहले नरेंद्र मोदी ने इस द्वीपीय देश की धरती पर कदम रखा था, जब उन्होंने विश्व हिंदू सम्मेलन में हिस्सा लिया था। अब प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी वापसी इस संबंध को और गहरा बना रही है।
वर्ष 2000… स्थान – पोर्ट ऑफ स्पेन, त्रिनिदाद। यहां आयोजित हुआ था विश्व हिंदू सम्मेलन, जिसमें भारत से आए उस समय के बीजेपी महासचिव नरेंद्र मोदी ने ‘आधुनिक युग में हिंदू दृष्टिकोण’ पर ओजस्वी भाषण दिया था। उस समय उनके भाषण को आयोजकों ने ‘सिंह की गर्जना’ कहा था।
सम्मेलन में उन्होंने भारतीय संस्कृति, स्वराज और सनातन मूल्यों को दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया था। वह यात्रा त्रिनिदाद के हिंदू समुदाय के लिए बेहद प्रेरणादायक साबित हुई।
अब 25 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आधिकारिक दौरे पर त्रिनिदाद पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 1999 के बाद पहली यात्रा है।इस ऐतिहासिक अवसर पर पीएम मोदी ने त्रिनिदाद की संसद को संबोधित किया और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का आह्वान किया।
उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो (ORTT)’ से नवाज़ा गया।त्रिनिदाद की आबादी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय मूल का है, जिनके पूर्वज 19वीं सदी में गिरमिटिया मज़दूर बनकर यहां आए थे। मोदी ने भारतीय प्रवासियों की इस ऐतिहासिक यात्रा को ‘साहस और आत्मबल का प्रतीक’ बताया।हालांकि, इस यात्रा के दौरान कुछ मुस्लिम संगठनों ने पीएम मोदी के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर चिंता भी जताई, लेकिन बहुसंख्यक प्रवासी भारतीय समुदाय ने उन्हें गर्व और सम्मान के साथ देखा।
चाहे 25 साल पहले का विश्व हिंदू सम्मेलन हो, या आज का राजनयिक दौरा—प्रधानमंत्री मोदी और त्रिनिदाद के रिश्ते में गहराई भी है और गरिमा भी।
यह दौरा न सिर्फ अतीत की स्मृति है, बल्कि भविष्य की साझेदारी की भी एक नई शुरुआत है।




