कैरेबियाई देश त्रिनिडाड एंड टोबैगो की धरती पर उस वक्त भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ भारतीय मूल के लोगों द्वारा प्रस्तुत की गई सांस्कृतिक झलक देखी। ढोल-मंजीरे की थाप पर जब पारंपरिक भोजपुरी चौताल गूंजा, तो प्रधानमंत्री मोदी visibly भावुक हो गए।
भारत से हजारों किलोमीटर दूर, लेकिन दिलों से बेहद करीब—यह दृश्य भारत और ग्लोबल साउथ के बीच उस गहरे सांस्कृतिक रिश्ते की याद दिलाता है, जो पीढ़ियों से जुड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके को “एगो अनमोल सांस्कृतिक जुड़ाव” करार दिया। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारे साझा इतिहास, संघर्ष और संस्कारों की जीवंत प्रस्तुति है।”
यह कार्यक्रम त्रिनिडाड में भारतीय प्रवासियों की स्मृति में आयोजित किया गया, जिसमें भोजपुरी गीत-संगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा की झलक ने समां बांध दिया।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि त्रिनिडाड जैसे देशों में भारतीय संस्कृति की जीवंतता देखकर उन्हें गर्व होता है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को भारत का “सांस्कृतिक राजदूत” बताया।
इस यात्रा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भाषा, संस्कृति और परंपरा के धागे चाहे कितनी भी दूर फैले हों, वे हमेशा भारत माता से जुड़े रहते हैं।
[वीडियो विज़ुअल सुझाव:]
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मंच पर प्रस्तुत भोजपुरी चौताल और ढोल-मंजीरे की झलकियां।
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प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया, हाथ जोड़कर भावविभोर होते हुए।
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कार्यक्रम में पारंपरिक कपड़ों में कलाकारों की प्रस्तुति।




