राहुल बोले: एकाधिकार की नीति ने उड़ाया इंडिगो का संतुलन, आम यात्री भुगत रहे कीमत

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देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन इंडिगो में पिछले कुछ दिनों से जारी परिचालन संकट के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बड़ी संख्या में उड़ानों के रद्द होने और देरी से यात्री जहां परेशान हैं, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। राहुल गांधी ने कहा कि इंडिगो की विफलता सीधे-सीधे सरकार द्वारा बनाए गए “एकाधिकार मॉडल” का परिणाम है, जिसमें प्रतिस्पर्धा कम होने से किसी भी बड़ी कंपनी में आई गड़बड़ियों का सीधा बोझ आम नागरिकों पर पड़ता है। उनका कहना है कि जब बाजार में विकल्प सीमित कर दिए जाते हैं, तब किसी एक कंपनी के परिचालन में अव्यवस्था आने का असर पूरे देश की विमानन व्यवस्था पर पड़ता है और यात्री मजबूरी में कीमत चुकाते हैं।

इंडिगो की उड़ानों पर अचानक बढ़ी रद्दीकरण और देरी की घटनाओं ने कई बड़े हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी मचा दी। कई रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद में सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुई हैं, जिससे यात्रियों को री-शेड्यूलिंग, प्रतीक्षा और होटल व्यवस्था सहित कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। एयरलाइन ने स्थिति सामान्य करने के लिए प्रयासरत रहने का दावा किया है और नियामक DGCA भी लगातार एयरलाइन प्रबंधन से अपडेट लेकर स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि इंडिगो फरवरी तक पूर्ण परिचालन को स्थिर करने की दिशा में काम कर रही है।

इस संकट को लेकर राजनीतिक विमर्श भी बढ़ता जा रहा है, जिसमें विपक्ष इसे सरकार की नीतिगत असफलता बता रहा है जबकि कुछ विशेषज्ञ इसे परिचालन संबंधी समस्याओं, क्रू उपलब्धता और तकनीकी चुनौतियों से जोड़ते हैं। विपक्ष का आरोप है कि यदि बाजार में प्रतिस्पर्धा संतुलित होती, तो किसी एक एयरलाइन के संकट का इतना व्यापक असर देश की पूरी विमानन प्रणाली पर नहीं पड़ता। हालांकि सरकार की ओर से अभी इस पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन DGCA की सक्रियता से स्पष्ट है कि केंद्र स्थिति को स्थिर करने के लिए तत्काल कदम उठा रहा है। फिलहाल देश इंतजार कर रहा है कि इंडिगो जल्द सामान्य हो और यात्रियों की मुश्किलों का समाधान हो सके।

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