नए व्यापार समझौतों से भारत में एफडीआई को मिलेगा बड़ा बूस्ट, निवेशकों की पहली पसंद बना देश

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नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में निवेश सुस्ती के बावजूद भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद गंतव्य के रूप में उभरकर सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए व्यापार समझौतों, निवेश-अनुकूल नीतियों और मजबूत आर्थिक बुनियाद के चलते अगले वर्ष भारत में एफडीआई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। दुनिया के कई देशों में निवेश प्रवाह घटने के बीच भारत का स्थिर और दीर्घकालिक विकास मॉडल विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।

सरकार द्वारा हाल के वर्षों में किए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) एफडीआई बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत-न्यूज़ीलैंड एफटीए, यूरोपीय देशों के साथ निवेश समझौते और अन्य द्विपक्षीय करार भारतीय बाजार को वैश्विक कंपनियों के लिए और अधिक सुलभ बना रहे हैं। इन समझौतों से न केवल निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार भारत की मजबूत घरेलू मांग, बड़ा उपभोक्ता बाजार, युवा कार्यबल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विदेशी कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहे हैं। ‘मेक इन इंडिया’, ‘पीएलआई स्कीम’, स्टार्टअप इकोसिस्टम और कारोबार में आसानी (Ease of Doing Business) से जुड़े सुधारों ने निवेशकों का भरोसा और बढ़ाया है। यही कारण है कि वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बावजूद भारत में एफडीआई का प्रवाह स्थिर बना हुआ है और आने वाले समय में इसके और तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकारी आंकड़ों और उद्योग अनुमानों के मुताबिक बीते वर्षों में भारत में एफडीआई का स्तर मजबूत रहा है और 2026 तक इसके नए रिकॉर्ड बनाने की संभावना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत न केवल एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सुरक्षित निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है। नई व्यापार साझेदारियों, नीति स्थिरता और दीर्घकालिक विकास की स्पष्ट दिशा के चलते भारत निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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