ट्रंप-जेलेंस्की मुलाकात से पहले पुतिन की चेतावनी, बोले– शांति नहीं तो युद्ध तय

SHARE:

यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के बीच प्रस्तावित अहम बैठक से ठीक पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कड़ा संदेश देकर अंतरराष्ट्रीय हलकों में चिंता बढ़ा दी है। पुतिन ने साफ संकेत दिया है कि अगर यूक्रेन शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं लेता है, तो रूस सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा और अपने सभी लक्ष्यों को बल प्रयोग से हासिल करेगा।

पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस ने कीव समेत यूक्रेन के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों के कारण राजधानी कीव में बिजली, पानी और हीटिंग जैसी जरूरी सेवाएं बाधित हुई हैं और आम नागरिकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रूस का दावा है कि ये हमले उसकी “विशेष सैन्य अभियान” रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य यूक्रेन पर दबाव बढ़ाना है।

रूसी राष्ट्रपति का कहना है कि यूक्रेनी नेतृत्व अब तक युद्ध समाप्त करने को लेकर स्पष्ट और व्यावहारिक रुख नहीं दिखा रहा है। पुतिन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर कीव सरकार बातचीत से बचती रही या रूस की शर्तों को नजरअंदाज करती रही, तो संघर्ष और लंबा खिंच सकता है। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एक तरह के “अल्टीमेटम” के रूप में देख रहे हैं।

दूसरी ओर, ट्रंप और जेलेंस्की की प्रस्तावित मुलाकात को युद्ध समाधान की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की का दावा है कि उनका शांति प्रस्ताव लगभग तैयार है और इसमें राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को शामिल किया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया है कि यूक्रेन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

यूक्रेन का स्पष्ट रुख है कि वह किसी ऐसे शांति समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें उसके क्षेत्र पर रूस का नियंत्रण मान लिया जाए। जेलेंस्की लगातार यह कहते आए हैं कि शांति तभी संभव है जब यूक्रेन की सीमाओं और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाए। इसी कारण रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत की राह बेहद जटिल बनी हुई है।

रूस की तरफ से यह भी कहा गया है कि पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका, की भूमिका इस युद्ध को और लंबा कर रही है। मॉस्को का आरोप है कि यूक्रेन को सैन्य सहायता देकर पश्चिमी देश संघर्ष को हवा दे रहे हैं। वहीं, यूरोपीय देश और अमेरिका अब भी यूक्रेन के समर्थन में खड़े हैं और रूस पर युद्ध विराम के लिए दबाव बना रहे हैं।

कुल मिलाकर, पुतिन की चेतावनी और ट्रंप-जेलेंस्की बैठक से पहले का यह घटनाक्रम बताता है कि यूक्रेन युद्ध फिलहाल समाप्ति से दूर है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कूटनीति भारी पड़ती है या फिर युद्ध और अधिक विनाशकारी रूप लेता है।

Leave a Comment