केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और एमएसएमई सेक्टर को नई ऊर्जा देने के लिए दो बड़े फैसलों को मंजूरी दी है। कैबिनेट की बैठक में अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030–31 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है, वहीं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को मजबूती देने के लिए भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने को भी हरी झंडी दे दी गई है। इन दोनों फैसलों को सरकार की समावेशी विकास नीति की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
अटल पेंशन योजना को 2030–31 तक बढ़ाए जाने से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। यह योजना मुख्य रूप से ऐसे लोगों के लिए बनाई गई है, जिनके पास नियमित आय का कोई स्थायी साधन नहीं होता और जो भविष्य के लिए बचत नहीं कर पाते। योजना के तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के लोग इसमें शामिल हो सकते हैं और 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें उनके योगदान के आधार पर हर महीने 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की गारंटीड पेंशन मिलती है। सरकार ने इस योजना के प्रचार-प्रसार, जागरूकता अभियान और विकासात्मक गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता जारी रखने का भी फैसला किया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें और सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक हो सके।
दूसरी ओर, एमएसएमई सेक्टर को गति देने के लिए SIDBI को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने का फैसला लिया गया है। यह राशि चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी, जिससे बैंक की पूंजी आधार मजबूत होगी और वह छोटे उद्योगों को अधिक मात्रा में सस्ता कर्ज उपलब्ध करा सकेगा। एमएसएमई सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि यह न सिर्फ बड़े पैमाने पर रोजगार देता है, बल्कि निर्यात और औद्योगिक उत्पादन में भी अहम भूमिका निभाता है। सरकार का मानना है कि SIDBI को मिलने वाली यह पूंजी सहायता लाखों नए और मौजूदा उद्यमों को वित्तीय संबल देगी, जिससे उनके कारोबार का विस्तार होगा और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सरकार को उम्मीद है कि इन दोनों फैसलों का संयुक्त असर देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक पड़ेगा। अटल पेंशन योजना के विस्तार से सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी और लोगों को भविष्य के लिए बचत के प्रति प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि SIDBI को दी गई इक्विटी सहायता से एमएसएमई सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी। इन कदमों को सामाजिक समावेशन और आर्थिक विकास की दिशा में सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।




