कमजोर रुपया, महंगाई का खतरा: डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर भारतीय मुद्रा

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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया एक बार फिर तेज गिरावट के साथ रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 31 पैसे टूटकर लगभग 1 डॉलर के मुकाबले 91.28 रुपये के स्तर पर आ गया, जो अब तक का सर्वकालिक निचला स्तर माना जा रहा है। लगातार कमजोर होते रुपये ने बाजार, निवेशकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई, आयात लागत और विदेशी खर्चों पर पड़ता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक रुपये की इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूत स्थिति है, जो दुनिया भर में सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के चलते निवेशक जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर में निवेश कर रहे हैं। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से लगातार पूंजी निकालना भी रुपये पर दबाव बना रहा है।

रुपये की कमजोरी से भारत के आयात पर सीधा असर पड़ता है, खासकर कच्चे तेल जैसे जरूरी उत्पादों की लागत बढ़ जाती है। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का खतरा रहता है और महंगाई पर दबाव बन सकता है। विदेशी यात्रा, पढ़ाई और इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे आयातित उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं। हालांकि कमजोर रुपये का फायदा निर्यातकों को मिलता है, क्योंकि उन्हें डॉलर में होने वाली कमाई के बदले ज्यादा रुपये मिलते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है, लेकिन फिलहाल उसने सीमित स्तर पर ही कदम उठाए हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जब तक विदेशी पूंजी की निकासी जारी रहेगी और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है। आने वाले दिनों में रुपये की चाल काफी हद तक वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेश के रुख पर निर्भर करेगी।

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