कर्नाटक में गहराया राज्यपाल-सरकार विवाद, अभिभाषण बना वजह

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कर्नाटक में एक बार फिर राज्यपाल और निर्वाचित सरकार के बीच संवैधानिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। बेंगलुरु स्थित विधान सौध में विधानसभा के संयुक्त सत्र के दौरान उस समय बड़ा राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया, जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत सरकार द्वारा तैयार किया गया अभिभाषण पूरा पढ़े बिना ही सदन से बाहर चले गए। यह घटनाक्रम सदन की कार्यवाही शुरू होते ही हुआ और इसके तुरंत बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोध दर्ज कराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया।

दरअसल, विधानसभा के विशेष सत्र के लिए राज्य सरकार ने राज्यपाल के अभिभाषण का मसौदा तैयार किया था, जिसमें सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और कुछ केंद्रीय नीतियों पर असहमति से जुड़े बिंदु शामिल थे। जैसे ही राज्यपाल ने अभिभाषण शुरू किया, उन्होंने केवल शुरुआती दो पंक्तियां पढ़ीं और फिर अचानक भाषण रोककर सदन से चले गए। इसे लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे संवैधानिक परंपराओं का उल्लंघन बताया। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वे मंत्रिपरिषद की सलाह पर पूरा अभिभाषण पढ़ें।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह न केवल सदन का अपमान है, बल्कि संविधान की भावना के भी खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो राज्य सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जा सकती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 163 और 176 के तहत राज्यपाल को सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण पढ़ना होता है, न कि उसे मनमाने ढंग से अधूरा छोड़ना।

वहीं, विपक्षी भाजपा ने राज्यपाल के रुख का समर्थन किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार ने अभिभाषण में ऐसे राजनीतिक और विवादित मुद्दे शामिल किए थे, जिन्हें पढ़ना राज्यपाल के लिए उचित नहीं था। उनका आरोप है कि कांग्रेस सरकार जानबूझकर टकराव की स्थिति पैदा कर रही है ताकि केंद्र और राज्यपाल को निशाने पर लिया जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इसे राज्यपाल बनाम सरकार के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह विवाद केवल एक भाषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्यों में राज्यपाल की भूमिका और संवैधानिक सीमाओं को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है। हाल के दिनों में अन्य राज्यों में भी इसी तरह के टकराव सामने आए हैं, जिससे संघीय ढांचे में संतुलन को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं।

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