छात्र आंदोलन से पहले कश्मीर में प्रशासन का सख्त एक्शन, कई बड़े नेता नजरबंद

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जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती समेत कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं को हाउस अरेस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई श्रीनगर सहित घाटी के अन्य इलाकों में प्रस्तावित छात्र आंदोलनों से पहले की गई, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके और किसी भी संभावित अशांति को रोका जा सके।

प्रशासनिक कार्रवाई के तहत महबूबा मुफ्ती, उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी, PDP नेता वहीद पारा और पूर्व श्रीनगर मेयर जुनैद मट्टू को उनके घरों तक सीमित कर दिया गया। इन नेताओं के आवासों के बाहर भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है, जिससे वे किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम या विरोध प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।

दरअसल, घाटी में छात्र वर्ग आरक्षण नीति में किए गए हालिया बदलावों और इसके रैशनलाइजेशन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। छात्रों का कहना है कि आरक्षण से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता की कमी है और इससे सामान्य वर्ग के युवाओं के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर श्रीनगर के गुपकर रोड सहित कई इलाकों में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, जिसमें कुछ राजनीतिक नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही थी।

छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार ने इस मुद्दे पर पहले एक समिति के गठन की घोषणा की थी, लेकिन लंबे समय बाद भी उसकी रिपोर्ट या ठोस समाधान सामने नहीं आया। इससे युवाओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है और वे अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन प्रशासन की सख्ती से उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह एहतियाती है और इसका उद्देश्य सार्वजनिक शांति बनाए रखना है। अधिकारियों के मुताबिक, संवेदनशील हालात को देखते हुए यह जरूरी था कि बड़े राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी से आंदोलन उग्र न हो। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है।

विपक्षी दलों और नेताओं ने हाउस अरेस्ट को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए आलोचना की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और जनता के मुद्दों के समर्थन में खड़ा होना लोकतंत्र का हिस्सा है। दूसरी ओर, प्रशासन इस बात पर जोर दे रहा है कि स्थिति नियंत्रण में रहे और किसी भी तरह की अव्यवस्था न फैले। फिलहाल घाटी में हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताए जा रहे हैं।

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